नीतीश कुमार के नेतृत्व में वित्तीय प्रबंधन में बिहार की क्रांतिकारी प्रगति

मुख्यमंत्री नितीश कुमार के शासन में बिहार के वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार आया है। इसकी वजह से राज्य की आमदनी में वृद्धि हुई। वित्तीय प्रक्रिया का प्रबंधन बेहतर और कुशल हुआ। ज़रूरत व प्राथमिकताओं के हिसाब से संसाधनों का आवंटन करने में मदद मिली। यही नहींइन सुधारों ने न सिर्फ राजस्व वसूली बढ़ाने में मदद की बल्कि प्रदेश के वित्तीय संस्थानों की पहुँच राज्य के दूर-दराज़ इलाकों में रहने वालों तक भी हुई है।

बिहार सरकार ने वित्तीय प्रबंधन के लिए निम्न दूरगामी कदम उठाए हैं।  

उठाये गए कदम:

  • अधिक प्रभावशाली बजटीय और वित्तीय नियंत्रण के लिए सभी विभागों में आंतरिक वित्तीय सलाहकार सेल का गठन किया गया।
  • कार्यप्रणाली को पूर्णतया स्वचालित बनाने के लिए राजकोषीय सुधारों की शुरुआत की गयी। नुक्सान रोकने में सक्षम ये सुधार बेहद कारगर साबित हुए। 
  • वर्ष 2011 में बिहार ट्रेजरी कोड लागू किया गया।
  • 30 जिलों में ट्रेजरी बिल्ड‍िंग का निर्माण पूरा कर लिया गया।
  • बेहतर कर वसूली व प्रबंधन के लिए वाणिज्य कर विभाग को स्वचालित बनाने की ओर ध्यान दिया गया। 
  • जनहित में ‘बिहार मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2005′ के तहत वैट 13.5 % से घटा कर पांच प्रतिशत कर दिया गया।
  • बैंकों की शाखाओं की संख्या में 158 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। यानी 2005-06 में जहां कुल 3,989 शाखाएं थींवहीं 2014-15 में 6,297 शाखाएं हो गईं।
  • सरकार द्वारा बैंको को अधिक से अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया गया। नतीजा लोन वितरण में 628% की भारी वृद्धि हुयी। वर्ष 2005-06 में जहां 14,808 करोड़ कर्ज दिए गए थे वहीं 2014-15 में 93,027 करोड़ कर्ज दिए गए।  
  • गाँव-गाँव तक बैंक की सुविधा पहुंचाने के लिए 12,995 बैंक प्रतिनिधि/ व्यापार समन्वयक नियुक्त किए गए।
  • भोले-भाले लोगों को अधिक ब्याज का वादा कर, पैसे जमा करा लेने वाली गैर बैंकिंग कंपनियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही के लिए सभी 9 मण्डल मुख्यालयों में विशेष अदालत का गठन किया गया। मामले के त्वरित निपटारे के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को और अधिक अधिकार दिए गए।
  • निवेशकों और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए चिट फण्ड अधिनियम 1982 के अंतर्गत वर्ष 2014 में बिहार को रजिस्ट्रार चिट्स के रूप में अधिसूचित किया गया।
  • बिहार वित्तीय अधिनियम 2006, 2007, 2010, 2011, 1012, 2013, 2014 और 2015 के तहत विभिन्न करों को अधिक तर्कसंगत बनाया गया।
  • आकस्मिक कोष को राज्य व्यय बजट का 4% तक बढ़ाने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि (संशोधन) अधिनियम,2015 लागू किया गया।
  • सन 2015 में बिहार एपरोपरिएशन रिपील एक्ट लागू किया गया।  
  • 2013 में जमाकर्ता हित संरक्षण (संशोधन) अधिनियम लागू किया गया।
  • करदाता व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए भामाशाह सम्मान योजना और वाणिज्य कर रत्न योजना शुरू की गयी। 

सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान देने के बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं। न केवल सरकार ने वित्तीय संस्थानों और कार्यप्रणालियों को मज़बूत बनाया है, बल्कि इन सुधारों से बिहार की जनता को बेहद लाभ पहुंचा हैं।  

उपलब्धियां और प्रभाव :

  • बिहार के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में औसतन वार्षिक 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2004-05 में जहां जीएसडीपी 77,781 थावहीं वर्ष 2014-16 में यह बढ़कर 4,02,282 करोड़ रुपए हो गया।
  • बिहार की प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (पीसीजीएसडीपी) औसतन 16.3 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ा। यानी वर्ष 2004-05 में जहां यह 7,914 करोड़ था, वहीं वर्ष 2014-15 में यह बढ़कर 36,143 करोड़ रुपए हो गया।
  • बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राजकोषीय घाटा तीन प्रतिशत तक सीमित रखा है।
  • विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन की वजह से 2004-05 के बाद से बिहार के पास लगातार राजकोषीय बचत है।
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन काल में बिहार का सार्वजानिक ऋण 2004-05 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 40 प्रतिशत से घट कर 2014-15 में 18.5% रह गया है।
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन में बिहार की कर वसूली वार्षिक 20.4 % की दर से औसतन बढ़ी है। यानी वर्ष 2004-05 के 3,374 करोड़ से बढ़ कर 2014-15 में यह 20,750 करोड़ रुपए हो गई है।
  • बिहार के वाणि‍ज्य कर विभाग ने पिछले नौ वर्षों में वाणि‍ज्य कर वसूली में छह गुनी बढ़ोतरी दर्ज की है। वर्ष 2005-06 में यह 2,390 करोड़ था जो वर्ष 2014-15 में में 13,758 करोड़ रुपए पहुंच गई।
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का कुल व्यय औसतन 17 प्रतिशत सालाना बढ़ा है। कुल व्यय वर्ष 2004-05 में 20,058 करोड़ था। वर्ष 2014-15 में बढ़कर यह 94,698 पहुँच गया है।
  • बिहार का कुल योजनागत व्यय औसतन 32% वार्षिक की दर से बढ़ते हुए वर्ष 2004-05  के 3,124 करोड़ से वर्ष 2014-15 में 43,932 करोड़ हो गया।
  • बिहार की पंजीकृत राजस्व प्राप्ति वर्ष 2005-06 में 566 करोड़ से पांच गुना बढ़ कर वर्ष 2014-25 में 2,903 हो गई है।
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन काल में कुल बजट अनुमान 2005-06 के 26,329 से बढ़ कर वर्ष 2014-15 में 1,20,685 करोड़ पहुँच गया।
  • बिहार की आबकारी राजस्व प्राप्ति 10 गुना बढ़ गई है। वर्ष 2005-06 में यह 320 करोड़ थी जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 3,218 करोड़ करोड़ हो गयी।
  • नीतीश कुमार की सरकार के शासन में ऋण-जमा अनुपात में लगातार सुधार हुआ है।
  • बैंक शाखाओं की संख्या में 158 प्रतिशत की वृद्धि होने से नागरिकों को बैंकिंग सुविधाएं हासिल करने में अब और आसानी होती है।
  • सरकार द्वारा बैंकों को प्रोत्साहन प्रदान करने की वजह से आम जनता के लिए लोन हासिल करना पहले से अधिक आसान हो गया है।
  • ट्रेज़रियों की संख्या 2004-05 में 61 थी जो 2014-15 में बढ़कर 74 हो गई है।
  • भामाशाह सम्मान योजना और वाणिज्य कर रत्न योजना के अंतर्गत सरकार ने 832 व्यपारियों को सम्मानित किया है।
  • खनन विभाग में राजस्व उगाही नौ गुना और परिवहन विभाग में चार गुना बढ़ गई है।

बिहार को इन सब कामों के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिली। सन 2013 में सिंगापुर के फ्यूचर गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ने राज्य सरकार को गवर्नमेंट सीएफओ अवार्ड 2013 से सम्मानित किया। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की वित्तीय प्रणाली, प्रक्रियाओं, कानूनों और प्रबंधन में लगातार सुधार जारी है ताकि राज्य मजबूत वित्तीय नियंत्रण व संतुलन बनाए रखे और दिनोदिन ऐसे ही तरक्की करता रहे।