केंद्र सरकार द्वारा गेहूँ पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) हटाये जाने से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे किसान

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भाजपा की केंद्र सरकार नें गेहूँ पर १० प्रतिशत आयात शुल्क हटा दिया है। इसका मतलब होगा की विदेशों से गेहूँ आयात करने पर किसी तरह का कर नहीं लगेगा। इसका सीधा खामियाजा देश भर के  किसानों को उठाना पड़ेगा क्योंकि बाजार में सस्ते विदेशी गेहूँ के उपलब्धता के वजह से भारतीय किसानों को गेहूँ की कीमत कम मिलेगी और भारतीय गेहूं की मांग में भारी कमी आएगी।

इस संदर्ब में निम्नलिखित बिंदुओं को संज्ञान में लेने की आवश्यकता है :

१. लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी नें किसानों को लगत मूल्य में पचास प्रतिशत मुनाफा जोड़कर देने की बात कही थी। दो दिन पहले गेहूं के आयात पर १० प्रतिशत आयात शुल्क हटाने से किसानों के आमदानी न सिर्फ घटेगी बल्कि वह हासिये पर आ जायेंगे जहाँ उन्हें लागत मूल्य का दाम भी नहीं मिल पायेगा।

२. दूसरे देश अपने किसानों को गेहूं जैसे फसलों की उपज के लिए भारत सरकार से कई गुना ज्यादा सहायता और सब्सिडी देते हैं ताकि उनके अनाज की कीमत विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक रहे। इसके वजह से विश्व बाजार में विदेशी गेहूं की कीमत काफी कम है। आयात शुल्क हटाकर भारत सरकार नें अपने ही देश के किसानों को विस्थापित कर रही है और दूसरे देशों को फायदा पहुंचा रही है । ये कैसा राष्ट्रवाद है ?

३. पिछले साल सरकार केंद्र सरकार नें कहा था की देश में गेहूं की पैदावार अपेक्षा के अनुरूप हुई है। मगर अब सरकार का कहना है की बफर स्टॉक में कमी आयी है। इसका सीधा मतलब है की सरकार नें कृषि की बेहाली को संज्ञान में नहीं लिया जिसकी वजह से देश में अनाज की समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसा अभूतपूर्व है की भारत जैसे अनाज निर्यात करने वाले देश को आज अनाज आयात करना पड़ रहा है।

४. विदेशों से आये गेहूं के कारण भारतीय गेहूं की मांग घटेगी। इसका सीधा प्रभाव गेहूं के दाम पर पड़ेगा और किसानों को इससे भारी घाटा उठाना पड़ेगा। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह बताये की यह कैसी नीति है जिससे देश के किसान और कमज़ोर होंगे और उनकी कृषक क्षमता घटेगी? जबकि राधा मोहन सिंह नें २६ मई २०१६ को इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा था की सरकार किसानों का मुनाफा दुगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये कैसी प्रतिबद्धता है की 6 महीने में किसानों की आमदनी कम कर दी गयी ?

५. सरकार का ये कदम सीधे तौर पर बड़े व्यवसायियों को फायदा पहुचाने के लिए लिया गया है ताकि उन्हें अनाज की खरीद में ज्यादा कीमत न चुकानी पड़े। भारतीय राजनीती के इतिहास में अब तक की ये सबसे किसान विरोधी सरकार है।