बिजली उत्पादन और वितरण में बढ़ता बिहार

2005 में जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने, उस समय बिहार देश का एकमात्र ऐसा राज्य था जो बिजली का उत्पादन नहीं करता था। बिजली के पारेषण और वितरण की बहुत ख़राब हालत थी। शहरों में लोगों को केवल छह से आठ घंटे बिजली मिलती थी जबकि गाँवों में लोगों को महज दो से तीन घंटे ही बिजली मिलती थी या एकदम ही नहीं मिलती थी।

नीतीश कुमार के शासन ने एक दशक में बिजली की सूरते हाल बिल्कुल बदल कर रख दी। नीतीश सरकार ने बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए आठ हज़ार करोड़ से भी ज़्यादा की योजनाएँ लागू कीं। शहरों में अब लोगों को बाईस से चौबीस घंटे बिजली मिलने लगी है और गाँवों में पंद्रह से सोलह घंटे। इसी के साथ नीतीश सरकार ने गाँवों और बिहार के दूर-दराज के इलाक़ों में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत काफ़ी तेज़ी से काम किया है।

क्याक्या कदम उठाए गए

  • “हमारा आधार ऊर्जास्वित बिहार” की दृ‍ष्टि‍ के साथ बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण में जबरदस्त सुधार के लिए आठ हज़ार करोड़ रुपए की योजनाएं लागू कीं।
  • मुज़फ्फ़रपुर ज़िले में कांटी बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड (KBUNL) का आधुनिकीकरण और नवीनीकरण किया गया ताकि प्लांट की लोड क्षमता बढ़ाई जा सके। प्लांट के विस्तारीकरण की योजना भी जनवरी 2016 पूरी हो जाएगी।
  • बरौनी थर्मल पावर स्टेशन की दो इकाइयों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण का काम शुरू किया गया। दो यूनिट के विस्तार का काम भी चल रहा है।
  • नबीनगर पावर जनरेटिंग कंपनी शुरू किया गया है। इसके पहले,  दूसरे और तीसरे चरणों को मार्च 2017, सितंबर 2017 और मार्च 2018 तक पूरा होना है।
  • चौसा (बक्सर), कजरा (लक्खीसराय) और पीरपैंती (भागलपुर) में 3 ग्रीन फ़ील्ड थर्मल पावर प्रोजेक्ट के समझतौते पर हस्ताक्षर किया गया है। हर प्रोजेक्ट की क्षमता 2×660 मेगावाट है।
  • पारेषण लाइनों, पावर सब-स्टेशनों और वितरण व्यवस्थाओं को बेहतर और मजबूत करने के लिएपिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष (Backward Regions Grant Fund), राज्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम के तहत कई योजनाएँ शुरू की गईं।
  • कई चरणों में कुल दो हज़ार सात सौ तिरपन करोड़ (2,753 करोड़) की लागत से पारेषण और उप-पारेषण व्यवस्थाओं को मज़बूत करने की पहल की गई है।
  • किसानों को खेती के लिए आसानी से बिजली उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएँ शुरू कर गईं हैं।
  • बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विभिन्न बैंकों के साथ मिल कर ऑनलाइन बिल भुगतान की सुविधा की शुरुआत की गई।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए बिहार की नीति की घोषणा की। इसके तहत अक्षय ऊर्जा के प्रसार और उपयोगिता को बढ़ाने पर काम हो रहा है।

बिजली उत्पादन और पारेषण पर सरकार के निरंतर ध्यान देने के स्थायी परिणाम सामने आए हैं।

उपलब्धियां और प्रभाव :

  • आज हर ज़िला मुख्यालय पर बाईस से चौबीस घंटे बिजली मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में चौदह घंटे तक बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
  • मुज़फ्फ़रपुर के केबीयूएनएल (KBUNL) की भार क्षमता 30% से बढ़ कर 95% से भी ज़्यादा हो गई है।
  • बाढ़ में एनटीपीसी प्लांट ने तो 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है।
  • बिहार में ग्रीड सब-स्टेशन की संख्या जो 2005 में 45 थी अब बढ़ कर 97 हो गई है।
  • पारेषण लाइनों की लम्बाई 5,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) से बढ़ कर 8,638 सर्किट किलोमीटर (ckm) हो गई है।
  • वर्तमान पारेषण लाइनों और ग्रीड सब-स्टेशनों की क्षमता में बढ़ोतरी से विद्युत निकासी क्षमता (power evacuation capacity) 1,000 मेगावाट से बढ़ कर 4408 मेगावाट हो गई है। ट्रांसफार्मेशन कैपासिटी 1300  एमवीए (MVA-मेगा वोल्ट एम्पि‍यर) से बढ़ कर 5510 एमवीए (MVA- मेगा वोल्ट एम्पि‍यर) हो गई है।
  • पावर सब-स्टेशन की संख्या 268 से बढ़ कर 628 हो गई है।
  • 33 केवी लाईन 3,754 सर्किट किलोमीटर से बढ़ कर 9,283 सर्किट किलोमीटर हो गई है। 11केवी लाईन की लम्बाई 12,248  सर्किट किलोमीटर से बढ़ कर 67,148 सर्किट किलोमीटर हो गई है।
  • नवंबर 2005 में लो टेंशन लाईन 33,018 सर्किट किलोमीटर थी जो अब बढ़ 13,6600 सर्किट किलोमीटर हो गई है।
  • विद्युत् पारेषण और वितरण के लॉस को कम करने के साथ-साथ तकनीकी और वा‍णि‍ज्य‍िक लॉस को भी कम किया गया है. उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी लिमिटेड (North Bihar Power Distribution Co. Ltd.) का कुल तकनीकी और वा‍णि‍ज्य‍िक लॉस 40.29% से कम हो कर32.37% हो गया है।
  • 39,073 राजस्व गांवों में से 36,504 गाँवों में बिजली पहुंच गई है। बाकी गाँवों में कार्य प्रगति पर है।
  • बारहवीं योजना की ग्रामीण विद्युतीकरण नीति के तहत 570 गाँवों का पूर्ण विद्युतीकरण रिकार्ड समय में पूरा कर लिया गया।
  • मुख्यमंत्री स्थानीय क्षेत्र विकास (CMLAD) और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD)योजनाओं के तहत 18,510 से भी ज़्यादा जले हुए ट्रांसफार्मर बदले गए। इसके अलावा, अन्य योजनाओं के तहत 46,564 ट्रांसफार्मर चौबीस घंटे के अंदर बदले गए।
  • ग्रामीण इलाक़ों में पन्द्रह से सोलह घंटे सप्लाई की जाने वाली बिजली का किसान खेती के लिए पूरा लाभ उठा सकते हैं।
  • 48,654 से भी ज़्यादा कृषि संबंधित कनेक्शन किसानों को उपलब्ध करवाया गया है और लगभग1,000 से भी ज़्यादा कृषि कनेक्शन सिर्फ फरवरी 2015 में ही दिए गए।
  • राज्य सरकार ने 54,410 किलोमीटर पुराने और ख़राब कंडक्टर को ठीक किया।
  • राज्य सरकार ने मीटरिंग, मीटर रीडिंग, बिल कलेक्शन, इनर्जी एकाऊंटिंग और इनर्जी ऑडिटिंग के लिए एक मज़बूत आईटी संरचना स्थापित की है।
  • मुख्यमंत्री नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम के तहत 949 सौर पम्प और बिहार सौर क्रान्ति सिंचाई योजना के अंतर्गत 521 सौर पम्प स्थापित किए गए हैं।

बिजली को अपनी एक प्रमुख प्राथमिकता बनाते हुए नीतीश कुमार सरकार ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इससे आगे बढकर,  सरकार का बिहार को बिजली के क्षेत्र में कुछ ही सालों में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने का इरादा है। अब जबकि कई योजनाएं आकार ले रही हैं,  वह दिन दूर नहीं जब बिहार के सभी शहरों और गाँवों को लगातार बिजली मिला करेगी और कोई भी समुदाय अँधेरे में नहीं रहेगा।